Shobhana Jain's blog China eyes on Bhutan, targets India | शोभना जैन का ब्लॉगः चीन की निगाहें भूटान पर, निशाना भारत पर!
चीन और भूटान के बीच सीमा चिह्नित नहीं है, जिसे लेकर अनेक सेक्टरों में दोनों देशों के बीच विवाद है.

Highlightsभूटान ने आक्रामक शक्तिशाली पड़ोसी से सधे हुए शब्दों में कहा कि चीन और भूटान के बीच सीमा को लेकर 25वें राउंड की वार्ता में सभी विवादित क्षेत्रों में अगले दौर में चर्चा की जाएगी. भूटान पर सीमा समझौता करने के लिए दबाव बनाया जा सके, यानी निगाहें भूटान के सकतेंग पर और निशाना भारत पर. उम्मीद इस बात से बंधती है कि भारत के भूटान के साथ ‘खास’ रिश्ते हैं, दोनों के बीच आपसी निकट सहयोग व गहरी समझ-बूझ है.

चीन के विस्तारवादी मंसूबे और आक्रामकता, दुनिया भर में अलग-थलग पड़ते जाने के बावजूद बदस्तूर जारी हैं. एक तरफ जहां चीन ने सैन्य तनाव के बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सहमति के बावजूद अपनी सेनाएं अभी पूरी तरह से नहीं हटाई हैं, वहीं पिछले दिनों उसने तवांग, अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे भूटान के सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य पर एक बार फिर अपना दावा ठोंक दिया है.

यह क्षेत्र भारत और भूटान दोनों के लिए ही सामरिक रूप से बहुत अहम है. यही नहीं, इस बार उसने पहली बार भूटान के पूर्वी सेक्टर में भी अपना दावा ठोंका है. सकतेंग पर दावे से चीन की मंशा साफ जाहिर है कि उसकी निगाहें सामरिक रूप से अहम उसी डोकलॉम पर यथावत  हैं, जहां 2017 में भारत और चीन के बीच 72 दिन तक चले सैन्य तनाव के दौरान फौजें आमने-सामने डटी रही थीं.

भारत भूटान के भू-क्षेत्र पर चीन के इस दावे से निश्चय ही और सतर्क हुआ है, क्योंकि इससे साफ जाहिर है कि डोकलाम को लेकर चीन के मंसूबे यथावत हैं, वहां उसने अपना सैन्य ढांचा मजबूत किया है और इस रणनीति के चलते उसके मंसूबे सामरिक रूप से संवेदनशील चुंबी घाटी की तरफ बढ़ने के हैं.

भारत, चीन और भूटान के त्रिकोण पर स्थित डोकलाम भारत की सुरक्षा के लिए सामरिक रूप से खासा अहम है. भूटान ने सकतेंग पर चीन के दावे पर उससे सीधे तौर पर विरोध जताया (भू्टान के चीन के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं) लेकिन साथ ही भूटान ने आक्रामक शक्तिशाली पड़ोसी से सधे हुए शब्दों में कहा कि चीन और भूटान के बीच सीमा को लेकर 25वें राउंड की वार्ता में सभी विवादित क्षेत्रों में अगले दौर में चर्चा की जाएगी.

विवाद को सुलझाने के लिए ‘पैकेज समाधान’ की पेशकश कर डाली

बाद में चीन ने पांसा पलटते हुए अपने तेवरों में नरमी लाते हुए एकाएक इस विवाद को सुलझाने के लिए ‘पैकेज समाधान’ की पेशकश कर डाली, जिसके तहत पहले भी उसने सकतेंग के आसपास दोनों देशों के कुछ क्षेत्रों की अदला-बदली की बात कही थी. माना जा रहा है कि इस बार यह मुद्दा उठाए जाने पर चीन की रणनीति है कि सामरिक नजरिये से अहम इस क्षेत्र को लेकर भूटान पर सीमा समझौता करने के लिए दबाव बनाया जा सके, यानी निगाहें भूटान के सकतेंग पर और निशाना भारत पर.

जाहिर है चीन की धोखेबाजी के ट्रैक रिकार्ड के चलते अब इस नए दावे ने पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पहले से ही व्याप्त तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है, जिस पर भारत की सतर्कता स्वाभाविक है, लेकिन उम्मीद इस बात से बंधती है कि भारत के भूटान के साथ ‘खास’ रिश्ते हैं, दोनों के बीच आपसी निकट सहयोग व गहरी समझ-बूझ है.

दरअसल चीन और भूटान के बीच सीमा चिह्नित नहीं है, जिसे लेकर अनेक सेक्टरों में दोनों देशों के बीच विवाद है. चीन ने पूर्वी भूटान के सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य पर अपने दावे के साथ इस बार एकाएक पहली बार भूटान के पूर्वी सेक्टर पर भी सीमा विवाद बता दिया.

चीन के साथ उसके रिश्तों का समीकरण इसी बात से समझा जा सकता है कि चीन के साथ उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन चीन बरसों से नेपाल की तरह भूटान को भी नजदीक लाने या सही मायने में वहां अपनी पैठ जमाने की कोशिश में जुटा है, जिसमें दबाव और नरमी दोनों ही हथकंडे इस्तेमाल कर रहा है.

चीन भूटान में अपनी पैठ बना ले तो वह भारत की सीमा के और करीब आ जाएगा

चीन की रणनीति है कि अगर चीन भूटान में अपनी पैठ बना ले तो वह भारत की सीमा के और करीब आ जाएगा. इसके साथ ही भारत-भूटान और चीन के बीच कुछ जगहें ऐसी हैं, जहां अगर चीन पहुंच जाए तो चिकन-नेक तक पहुंच जाएगा. इससे भारत पर निश्चित तौर पर दबाव बनेगा.

ऐसे में चीन बार-बार कोशिश करता रहता है कि या तो दबाव से या फिर  नरमी/ प्रलोभन से भूटान को अपने पक्ष में करे, लेकिन भूटान ने अभी तक उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखने की नीति ही अपनाई है. दूसरी तरफ भूटान से भारत के परंपरागत रूप से बेहद नजदीकी रिश्ते रहे हैं.

भारत की आजादी के बाद 1949 में दोनों देशों के बीच एक संधि हुई थी. इसमें अनेक प्रावधान थे और सबसे महत्वपूर्ण था रक्षा और विदेश मामलों में भारत से विचार-विमर्श. हालांकि परिस्थितियों में हो रहे बदलाव के मद्देनजर 2007 के बाद इस संधि में कई बदलाव हुए और अप्रचलित प्रावधानों को हटा दिया गया.

दोनों के बीच मजबूत आर्थिक, सामरिक सहयोग है. भूटान के साथ भारत की 605 किमी की सीमा के कारण इसका सामरिक महत्व तो है ही, साथ ही भारत और भूटान के बीच व्यापारिक संबंध भी काफी मजबूत हैं. भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापार साझीदार है.

उसने वहां जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण किया, जो कि भूटान के राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है. भारत के सहयोग से भूटान में विकास से जुड़ी कई परियोजनाएं चल रही हैं. इसके साथ ही उम्मीद है कि भारत सरकार भूटान के एक और स्थायी लैंड कस्टम स्टेशन खोलने के प्रस्ताव को भी सहमति दे सकती है.

इससे भूटान को निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी. खबरों के अनुसार विकास कार्यक्रमों के तहत ही भारत ने चर्चित अभयारण्य में  सड़क बनाने के लिए भूटान को मदद देने की भी पेशकश की है, जिस पर अभी भूटान ने जवाब नहीं दिया है. चीन का भूटान के साथ ताजा सीमा विवाद के जरिये निशाना भारत है.

भारत के रणनीतिक हितों को प्रभावित करने की कोशिश है, साथ ही भारत और भूटान के बीच गलत फहमियां खड़ी करने की साजिश भी हो सकती है. बहरहाल, दोनों देशों के बीच पीढ़ियों से चली आ रही गहरी आपसी समझ-बूझ और निरंतर बढ़ते सहयोग के बीच उम्मीद है कि दोनों देश इसी आपसी समझदारी से चीन के इस दावे से भी निपट लेंगे.

Web Title: Shobhana Jain's blog China eyes on Bhutan, targets India
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