Santosh Desai's blog appeal of nationalism youth, needs to be better understood | संतोष देसाई का ब्लॉग: कर्तव्य भावना का दुरुपयोग!
प्रतीकात्मक तस्वीर

हाल ही में एक कैब ड्राइवर ने अपने यात्री को पुलिस स्टेशन ले जाने का फैसला किया, क्योंकि वह यात्री सीएए का विरोधी था और वाहन में बैठकर उसी विषय पर चर्चा कर रहा था. यह एक बहुत ही डरावनी संभावना है कि नागरिक व्यक्तिगत स्तर पर निगरानी करने वाले की भूमिका निभाने का फैसला करें और यह तय करें कि किसी का कौन सा काम राष्ट्रविरोधी है.

हालांकि कैब ड्राइवर के दृष्टिकोण से देखें तो वह एक अच्छा काम कर रहा था. उसकी धारणा के अनुसार वाहन में बैठा यात्री गद्दार, राष्ट्रविरोधी था जो देश को क्षति पहुंचाना चाहता था. संभव है वह मान रहा हो कि ऐसा करके वह बहुत महान काम करने जा रहा है. हो सकता है इस बारे में उसके मन में दुविधा रही हो कि क्या कार्रवाई की जाए और उसने यात्री को पुलिस स्टेशन ले जाना ही सबसे बेहतर माना. लेकिन उसे अपने सही होने के बारे में जरा भी शंका नहीं थी.  

यह बात उन लोगों के बारे में भी सच है जो देश के नाम पर या अपने धर्म की रक्षा के नाम पर हिंसात्मक कार्य करने से भी नहीं हिचकते. उनमें से अधिकांश लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए ऐसा नहीं करते हैं. कुछ लोग होते हैं जो अपने राजनीतिक या वाणिज्यिक लाभ के लिए सच को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं, लेकिन एक बड़ा जनसमूह अपने सच्चे विश्वास की वजह से ऐसा करता है. इस विश्वास की ताकत उन्हें एक स्पष्ट झूठ को भी सच मानने के लिए प्रेरित करती है; क्योंकि वे मानते हैं कि किसी बड़े सच के लिए छोटा झूठ बोलना गलत नहीं है. पूरे देश में, राष्ट्रवाद का एक व्यापक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है और महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे कर्तव्य के रूप में लोगों के मन में बिठाया जा रहा है.

राष्ट्रवाद की अपील, विशेष रूप से युवाओं के बीच, को बेहतर ढंग से समझने की जरूरत है. देश की आर्थिक स्थिति और रोजगार के संकट को देखते हुए लोगों के भीतर चिंता और नाराजगी की भावना है जो अभिव्यक्त होने का रास्ता ढूंढ़ रही है. कोई भी सोच सकता है कि इस गुस्से का सबसे संभावित लक्ष्य सरकार होना चाहिए जिस पर पर्याप्त संख्या में रोजगार सृजन की जिम्मेदारी है. लेकिन भाजपा की सफलता राष्ट्रवाद पर जोर देने और इसे तात्कालिक मुद्दा बनाने में रही है, जो रोजगार सृजन सहित अन्य मुद्दे दबा दे.

Web Title: Santosh Desai's blog appeal of nationalism youth, needs to be better understood
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