हरीश गुप्ता का ब्लॉग: मोदी के मंत्रियों का नया आक्रामक रुख

By हरीश गुप्ता | Published: November 10, 2022 01:26 PM2022-11-10T13:26:31+5:302022-11-10T13:27:03+5:30

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी कई मौकों पर खुलकर अपने विचार रखते हुए देखा गया है-चाहे वह संसद में हो या बाहर। पेट्रोलियम और शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी इससे अलग नहीं हैं।

New aggressive stance of Modi's ministers | हरीश गुप्ता का ब्लॉग: मोदी के मंत्रियों का नया आक्रामक रुख

हरीश गुप्ता का ब्लॉग: मोदी के मंत्रियों का नया आक्रामक रुख

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Highlightsकांग्रेस में किसी को भी यह पता नहीं है कि राहुल ने हिमाचल में प्रचार करने के लिए एक संक्षिप्त ब्रेक क्यों नहीं लिया।कांग्रेस द्वारा सत्तारूढ़ भाजपा को कड़ी टक्कर देने और आम आदमी पार्टी द्वारा कदम पीछे खींच लेने के साथ, चुनाव द्विध्रुवीय हो गया है।हिमाचल में लगातार दूसरी बार किसी पार्टी के नहीं जीतने की परंपरा रही है। 

मोदी सरकार में एक नया पैटर्न उभर कर सामने आया है क्योंकि प्रमुख विभागों के कुछ मंत्री आक्रामक मुद्रा में हैं। वे शब्दों को घुमा-फिरा कर नहीं बल्कि सीधी बात करते हैं। यह सब विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ शुरू हुआ, जो जहां भी जाते हैं, सीधा बोलते हैं। एक विदेश मंत्री से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने विचारों को डिप्लोमेटिक तरीके से व्यक्त करेगा। 

लेकिन जयशंकर अमेरिका, यूरोप या रूस के नेताओं के साथ बातचीत के दौरान कूटनीति में एक नई पटकथा लिख रहे हैं। विदेश मामलों में अपने व्यापक अनुभव के कारण जयशंकर का दुनिया भर में अत्यधिक सम्मान किया जाता है। जब अमेरिका ने प्रतिबंध के बावजूद रूस से तेल खरीदने का मुद्दा उठाया तो उन्होंने अमेरिकियों से दोटूक कहा कि भारत यूरोप के मुकाबले कम तेल आयात कर रहा है। 

दूसरे, भारत अपने राष्ट्रीय हित को देखते हुए नीति तय करेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी कई मौकों पर खुलकर अपने विचार रखते हुए देखा गया है-चाहे वह संसद में हो या बाहर। पेट्रोलियम और शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी इससे अलग नहीं हैं। वे अमेरिका और अन्य देशों की अपनी यात्राओं के दौरान सख्त मुद्रा बनाए हुए थे। मंत्रियों के इस नए वर्ग में शामिल होने वालों में नवीनतम नाम कानून मंत्री किरण रिजिजू का है। 

वे मृदुभाषी हैं और हमेशा मुस्कुराते नजर आते हैं। लेकिन जब न्यायपालिका की बात आती है, तो वे उच्च न्यायपालिका पर हर तरफ से हमला करते हैं। 4 नवंबर को रिजिजू ने 'न्यायाधीशों की नियुक्ति की अपारदर्शी प्रणाली', जनहित याचिका प्रणाली सहित विभिन्न मुद्दों पर उच्च न्यायपालिका पर तीखा हमला करके सभी को चौंका दिया। पिछले कुछ महीनों के दौरान न्यायपालिका के कामकाज पर रिजिजू का यह चौथा हमला था। 

खास बात यह है कि प्रधानमंत्री ने इन मंत्रियों से कहा है कि वे खुलकर अपने विचार रखें और संकोच करने की जरूरत नहीं है। यह एक नए युग की शुरुआत है और आगे भी बहुत कुछ हो सकता है क्योंकि मोदी लगातार चुनावी जंग जीत रहे हैं। भारत जोड़ो, चुनाव छोड़ो! हिमाचल प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनावों के दौरान राहुल गांधी के 'भारत जोड़ो चुनाव छोड़ो' के मंत्र ने दोस्तों और दुश्मनों को समान रूप से चकित किया है। 

कांग्रेस में किसी को भी यह पता नहीं है कि राहुल ने हिमाचल में प्रचार करने के लिए एक संक्षिप्त ब्रेक क्यों नहीं लिया। कांग्रेस द्वारा सत्तारूढ़ भाजपा को कड़ी टक्कर देने और आम आदमी पार्टी द्वारा कदम पीछे खींच लेने के साथ, चुनाव द्विध्रुवीय हो गया है। दूसरे, हिमाचल में लगातार दूसरी बार किसी पार्टी के नहीं जीतने की परंपरा रही है। 

राहुल ही नहीं, सोनिया गांधी ने भी किसी भी राजनीतिक गतिविधि से परहेज किया है, हालांकि वे दिल्ली में प्रदूषण के कारण हिमाचल में डेरा डाले हुए हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि यह आंतरिक रूप से तय किया गया है कि प्रियंका गांधी वाड्रा हिमाचल चुनाव के लिए जिम्मेदार होंगी। तदनुसार, उन्होंने 14 अक्टूबर से पहाड़ी राज्य में प्रवेश किया और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पंजाब पीसीसी प्रमुख प्रताप सिंह बाजवा, सचिन पायलट, राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर अपनी कोर टीम बनाई। 

दिलचस्प बात यह है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनाव प्रचार के लिए हिमाचल नहीं गए हैं। इस बीच, राहुल गांधी की टीम ने संकेत दिया है कि वह गुजरात में बड़े पैमाने पर प्रचार करेंगे। लेकिन हिमाचल में उनके 'चुनाव छोड़ो' के फैसले से पार्टी में अच्छा संदेश नहीं गया है। यह प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए भी एक और परीक्षा होगी, जो पहले यूपी और पंजाब में अपनी उंगलियां जला चुकी हैं।

नगदी संकट से जूझ रहा विपक्ष

 2022 चुनावी इतिहास में एक निर्णायक समय हो सकता है क्योंकि विशेष रूप से गुजरात में नगदी की कमी के कारण विपक्षी दल पूरी तरह से अपंग हो गए हैं। हालांकि भाजपा राज्य में करीब 27 साल से सत्ता में है, लेकिन 2019 तक इस तरह की सख्ती का सामना कभी नहीं करना पड़ा। एक अभूतपूर्व स्तर की नगदी की कमी विपक्षी उम्मीदवारों विशेषकर आम आदमी पार्टी से संबंधित उम्मीदवारों को चुभ रही है। 

शराब लाइसेंस घोटाले का भंडाफोड़ होने के बाद दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार आदि में हवाला संचालकों के जरिये गुजरात में आने वाले पैसे पर अंकुश लगाने के लिए ईडी, सीबीआई, आयकर और अन्य एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। सभी बैरिकेड्स पर दूसरे राज्यों से आने वाली नगदी को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। 

गुजरात पुलिस ने हाल ही में राज्य के बाहर के लगभग 30 लोगों के नेटवर्क का भंडाफोड़ करने का दावा किया है, जिनका कथित तौर पर आप द्वारा विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में हवाला का पैसा बांटने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। सूरत ग्रामीण पुलिस को आप उम्मीदवार द्वारा दिए गए बयान से हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ। आप को अब आंच महसूस हो रही है।

आईटी अब जद (यू) के पीछे

आयकर विभाग ने शायद पहली बार बिहार में जनता दल (यू) पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। चूंकि नीतीश कुमार ने भाजपा को छोड़ दिया है, इसलिए केंद्रीय एजेंसियों को अब जद (यू) के पीछे जाने की छूट मिल गई है। राजद, कांग्रेस और अन्य दल 2019 से कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। लेकिन जद (यू) को हमेशा छूट हासिल थी, परंतु अब नहीं।

हाल ही में आईटी टीमों ने पटना के बिजनेसमैन गब्बू सिंह के यहां छापेमारी की थी। पटना में यह कोई रहस्य नहीं है कि गब्बू सिंह जद (यू) अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह और नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी हैं। संदेश पूरी तरह से स्पष्ट है।

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