ब्लॉग: भाजपा ने राहुल नार्वेकर को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष बनाकर शिवसेना-एनसीपी को दिया ये संदेश

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Published: July 4, 2022 02:44 PM2022-07-04T14:44:25+5:302022-07-04T14:45:19+5:30

राहुल नार्वेकर 15 साल तक शिवसेना में रह चुके हैं. विधान परिषद का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलने पर वे शिवसेना छोड़ एनसीपी में शामिल हो गए थे. इसके बाद वे भाजपा में चले गए.

BJP gives message on many fronts including by making Rahul Narvekar Speaker of Maharashtra Assembly | ब्लॉग: भाजपा ने राहुल नार्वेकर को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष बनाकर शिवसेना-एनसीपी को दिया ये संदेश

राहुल नार्वेकर को जिताकर से भाजपा ने दिए कई संदेश

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डेढ़ साल की रस्साकशी के बाद महाराष्ट्र विधानसभा को कांग्रेस के नाना पटोले के बाद नया अध्यक्ष मिल गया. राहुल नार्वेकर के रूप में चुने गए अध्यक्ष को मतदान से चुना गया, जिसमें 164 वोट विजयी उम्मीदवार को मिले, जबकि पराजित उम्मीदवार राजन साल्वी को 107 मतों से संतोष करना पड़ा. 

दरअसल महाराष्ट्र में विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव विवादों से घिरा था, जिसमें गुप्त मतदान को खुले मतदान में बदलने को लेकर अदालत के चक्कर लगाए जा रहे थे और उसी कारण राज्यपाल चुनाव की अनुमति नहीं दे रहे थे. अब नई सरकार के बनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष चुनाव पर कसौटी तय हुई तो भाजपा ने अपना उम्मीदवार जिताकर अपनी हैसियत का अहसास करा दिया. 

वहीं अब तक सबसे कम उम्र के विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर को बना कर भाजपा ने कई मोर्चों पर संदेश दे दिया. चूंकि नार्वेकर 15 साल तक शिवसेना में रह चुके हैं और विधान परिषद का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलने पर शिवसेना छोड़ राकांपा में शामिल हो गए थे. वहां भी वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में राकांपा के टिकट पर मावल सीट से हार मिलने के बाद वे वर्ष 2019 में भाजपा में शामिल हुए और उन्होंने विधानसभा चुनाव में दक्षिण मुंबई की कोलाबा सीट से शानदार जीत दर्ज की. 

नार्वेकर के जीवन के इसी उतार-चढ़ाव के कारण भाजपा ने केवल जीत ही दर्ज नहीं की, बल्कि शिवसेना और राकांपा को संदेश भी दिया. हालांकि उनके ससुर रामराजे निंबालकर विधान परिषद के सभापति हैं और राकांपा के टिकट पर ही विधान परिषद के सदस्य बने हैं. किंतु भाजपा नार्वेकर के बहाने कई बातें साफ करने में सफल हुई है. वह भी एक ऐसे नाजुक समय में जब विश्वास और अविश्वास का संकट हर तरफ गहरा चुका है. 

इससे विधानसभा उपाध्यक्ष के माध्यम से चले कामकाज पर भी अंकुश लग जाएगा. वर्तमान में विधायकों की अयोग्यता पर उपाध्यक्ष के नोटिस पर अदालत में फैसला लंबित है. सोलह विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना का भविष्य तय होगा. फिलहाल विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना और भाजपा का पलड़ा भारी हो चुका है. 

इससे भी ठाकरे नीत शिवसेना को अपनी स्थिति का अहसास कर लेना चाहिए. मगर वह मानसिक संतोष के लिए 11 जुलाई तक अदालत के फैसले का इंतजार करेगी. फिलहाल ताजा चुनाव के बीच नार्वेकर की जिम्मेदारी बढ़ जाती है. उनका निष्पक्ष रवैया ही महाराष्ट्र की राजनीति को दिशा देगा. उनके पुराने संबंध सदन को सुगमता से चलाने में सफल होंगे, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच सदन के भीतर तनाव कम करना असली चुनौती और बदली परिस्थितियों को सहज स्तर पर ले जाने की आवश्यकता भी होगी. 

Web Title: BJP gives message on many fronts including by making Rahul Narvekar Speaker of Maharashtra Assembly

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