Awadhesh Kumar Blog on Assam NRC issue | विदेशियों की पहचान पर हंगामा क्यों?
विदेशियों की पहचान पर हंगामा क्यों?

अवधेश कुमार

यह आशंका पहले से थी कि असम में एनआरसी या नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स यानी नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर का मसौदा जारी होने के साथ राजनीतिक हंगामा होगा। यह साफ था कि जब नए सिरे से वास्तविक नागरिकों और विदेशियों की व्यापक स्तर पर छानबीन हो रही है तो काफी लोगों का नाम इस रजिस्टर में नहीं होगा। वही हुआ है. 3 करोड़ 29 लाख 91 हजार 380 लोगों के आवेदन में से 2 करोड़ 89 लाख 38 हजार 677 का नाम अंतिम मसौदे में आने का अर्थ हुआ कि शेष 40 लाख 52 हजार 708 लोग संदिग्ध अवस्था में हैं। किंतु खड़ा किए जा रहे तूफान के पीछे नैतिकता का आधार नहीं है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्नी ममता बनर्जी इस समय गृहयुद्ध और रक्तपात की धमकी दे रही हैं। जब वो सत्ता में नहीं थीं तो उनके लिए विदेशी घुसपैठियों की पहचान बड़ा मुद्दा था। ममता बनर्जी का उदाहरण ही यह साबित करता है कि पूरा मामला कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाने का है। जो राजनीतिक दल 2019 में एक समुदाय विशेष के मतों का ध्रुवीकरण करने का मंसूबा पाले हैं उनके लिए तो यह समस्या है ही।
 
हालांकि महापंजीयक शैलेश ने साफ किया है कि जिनका नाम नहीं है उन सबको अपना दावा करने और आपत्ति जताने का मौका मिलेगा। उसकी जांच होगी, सही पाने पर शामिल किया जाएगा, कुछ गलती है तो उसे सुधारा जाएगा। ऐसे लोग जिनको मदद की आवश्यकता है उनको एनआरसी टीम मदद करेगी। उनके लिए अभियान भी चलाया जाएगा। किंतु हंगामा किस बात का? क्या राजनीतिक दलों की हमदर्दी विदेशी घुसपैठियों के लिए है?

1951 में हुई जनगणना के बाद पहला एनआरसी रजिस्टर बना था। सरकार के आदेश पर 1960 में एनसीआर विवरणी को पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस उस पर कार्रवाई करती तो समस्या का कुछ समाधान होता। लेकिन इस विवरणी को नए सिरे से अद्यतन करने की मांग जोर पकड़ने लगी। कारण, पड़ोसी देश से आने वालों ने असम के अनेक क्षेत्नों में अशांति एवं तनाव पैदा कर दिया था। केंद्र की अनसुनी एवं स्थिति बिगड़ने के बाद 1979 से इनको बाहर निकालने के लिए व्यापक जन आंदोलन आरंभ हो गया। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) और ऑल असम गण संग्राम परिषद के बैनर तले चले आंदोलन पता नहीं हमारे नेताओं को याद हैं भी या नहीं। असम के लोगों की मांग बहुत स्पष्ट थी, बाहर से आए लोगों को वापस भेजा जाए या कहीं और बसाया जाए।

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