Anil Jain Blog: Gas tragedy still a curse for Bhopal | अनिल जैन का ब्लॉग: गैस त्रासदी को अभी भुगत रहा भोपाल
अनिल जैन का ब्लॉग: गैस त्रसदी को अभी भुगत रहा भोपाल

इंसान को तमाम तरह की सुख-सुविधाओं के साजो-सामान देने वाला सतर्कताविहीन या गैरजिम्मेदाराना विकास कितना मारक हो सकता है, इसकी जो मिसाल भोपाल में साढ़े तीन दशक पहले देखने को मिली थी, उसे वहां अभी भी अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग रूपों में देखा जा सकता है.

आज से ठीक 35 वर्ष पहले दो और तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात को यूनियन कार्बाइड के कारखाने से निकली जहरीली गैस (मिक यानी मिथाइल आइसो साइनाइट) ने अपने-अपने घरों में सोये हजारों लोगों को एक झटके में हमेशा-हमेशा के लिए सुला दिया था. जिन लोगों को मौत अपने आगोश में नहीं समेट पाई थी वे उस जहरीली गैस के असर से मर-मर कर जिंदा रहने को मजबूर हो गए थे. 

ऐसे लोगों में कई लोग तो उचित इलाज के अभाव में मर गए और जो किसी तरह बच गए उन्हें तमाम संघर्षो के बावजूद न तो आज तक उचित मुआवजा मिल पाया और न ही उस त्नासदी के बाद पैदा हुए खतरों से पार पाने के उपाय किए जा सके हैं.

अब भी भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने का सैकड़ों टन जहरीला मलबा उसके परिसर में दबा या खुला पड़ा हुआ है. इस मलबे में कीटनाशक रसायनों के अलावा पारा, सीसा, क्रोमियम जैसे भारी तत्व हैं, जो सूरज की रोशनी में वाष्पित होकर हवा को और जमीन में दबे रासायनिक तत्व भू-जल को जहरीला बनाकर लोगों की सेहत पर दुष्प्रभाव डाल रहे हैं. यही नहीं, इसकी वजह से उस इलाके की जमीन में भी प्रदूषण लगातार फैलता जा रहा है और आसपास के इलाके भी इसकी चपेट में आ रहे हैं.

भोपाल गैस त्नासदी के बाद से ही मांग की जाती रही है कि औद्योगिक इकाइयों की जवाबदेही स्पष्ट की जाए. मगर अभी तक सभी सरकारें इससे बचती रही हैं. शायद उनमें इसकी इच्छाशक्ति का ही अभाव रहा है. इसी का नतीजा है कि भोपाल गैस त्नासदी के पीड़ित परिवारों को आज तक मुआवजे के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. 

भोपाल गैस त्नासदी के मामले में जब औद्योगिक कचरे के निपटान में ऐसी अक्षम्य लापरवाही बरती जा रही है, तो वैसे मामलों में सरकारों से क्या उम्मीद की जा सकती है, जो चर्चा का विषय नहीं बन पाते.

Web Title: Anil Jain Blog: Gas tragedy still a curse for Bhopal
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