Jayantilal Bhandari blog: India agricultural exports growing amid Corona crisis | कोरोना के बीच भारत के लिए राहत, बढ़ रहा है देश का कृषि उत्पादों का निर्यात
कोरोना के बीच कृषि क्षेत्र से भारत के लिए राहत की खबर (फाइल फोटो)

कोरोना महामारी की चुनौतियों के बीच देश से कृषि उत्पादों के निर्यात की ऊंचाई का सुकूनभरा परिदृश्य दिखाई दे रहा है. यद्यपि कोरोना महामारी ने अकल्पनीय मानवीय और आर्थिक आपदाएं निर्मित की हैं, लेकिन इन आपदाओं के बीच भारत ने वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के मद्देनजर कृषि उत्पादों के निर्यात बढ़ाने का अवसर मुट्ठियों में किया है. 

इतना ही नहीं, भारत दुनिया में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति के लिए एक विश्वसनीय निर्यातक देश के रूप में उभरकर सामने आया है.

हाल ही में कृषि मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष 2020-21 के अप्रैल से फरवरी के 11 महीनों के दौरान देश से 2.74 लाख करोड़ रु. के कृषि उत्पादों का निर्यात किया गया. यह सालभर पहले की इसी अवधि के 2.31 लाख करोड़ रु. की तुलना में 16.88 फीसदी ज्यादा रहा है. 

यद्यपि इसी अवधि में कृषि एवं संबंधित वस्तुओं का आयात भी तीन फीसदी बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रु. पर पहुंच गया है लेकिन इसके बावजूद भारत के पक्ष में कृषि व्यापार संतुलन बढ़कर 1.32 लाख करोड़ रु. पर पहुंच गया है.

यदि हम कृषि निर्यात के आंकड़ों को देखें तो पाते हैं कि चावल, गेहूं, मोटे अनाज के निर्यात में अप्रैल से फरवरी 2021 की अवधि के दौरान तेज वृद्धि हुई है. चूंकि दुनिया के कई खाद्य निर्यातक देश कोरोना महामारी के व्यवधान के कारण चावल, गेहूं, मक्का और अन्य कृषि पदार्थों का निर्यात करने में पिछड़ गए, ऐसे में भारत ने इस अवसर का दोहन करके कृषि निर्यात बढ़ा लिया. 

भारत से गेहूं के निर्यात में जबर्दस्त वृद्धि

भारत से गेहूं के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. गेहूं का निर्यात सालभर पहले के 425 करोड़ रु. से बढ़कर 3283 करोड़ रु. के स्तर पर पहुंच गया. खासतौर से अफगानिस्तान को 50 हजार टन और लेबनान को 40 हजार टन गेहूं निर्यात किया गया है. गैरबासमती चावल का निर्यात 13030 करोड़ रु. से बढ़कर 30277 करोड़ रु. पर पहुंच गया है. 

भारत ने ब्राजील, चिली जैसे कई नए बाजारों में पकड़ बनाई है. खास बात यह भी है कि चीन ने भी भारत से बासमती चावल खरीदना शुरू किया है. खाद्यान्न के अलावा अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में भी डॉलर मूल्यों के आधार पर अच्छी वृद्धि हुई है. 

इनमें खासतौर से प्रसंस्कृत सब्जियों में करीब 36.5 प्रतिशत, मिल्क प्रोडक्ट्स में करीब 34.3 प्रतिशत, प्रसंस्कृत खाद्य वस्तुओं में 30.2 प्रतिशत, दलहन में 26.3 प्रतिशत, ताजा सब्जियों और बीज में 12.2 प्रतिशत तथा ताजे फलों में करीब 6.4 फीसदी वृद्धि उल्लेखनीय है.  

निस्संदेह कोविड-19 के बीच दुनिया भर में लॉकडाउन और कोविड -19 के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए यात्रा प्रतिबंध लगाए जाने से खाद्य पदार्थों के वैश्विक खरीदारों के साथ जुड़ना मुश्किल काम था. 

ऐसे में कृषि निर्यात संबंधी विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने विशिष्ट वर्चुअल वैश्विक कृषि व्यापार मेलों और देश के कृषि पदार्थों के निर्यातकों के साथ वैश्विक खरीदारों की अलग-अलग इंटरैक्शन मीट आयोजित की. 

इतना ही नहीं, एपीडा ने विभिन्न विभागों के साथ निकट समन्वय स्थापित किया और निर्यात को बढ़ाने के लिए दिन-प्रतिदिन के आधार पर कृषि निर्यातकों के साथ संपर्क बनाए रखा. इसके साथ-साथ केला, अंगूर, प्याज, आम, अनार, पुष्प आदि के लिए निर्यात संवर्धन मंच (ईपीएफ) की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है.

भारत के कृषि, अनुसंधान और कृषि मानकों को दुनिया ने माना

यह भी उल्लेखनीय है कि कृषि पदार्थों का निर्यात बढ़ाने में भारत के कृषि, अनुसंधान और कृषि मानकों की वैश्विक मान्यता ने भी अहम भूमिका निभाई है. 

भारत के पास खाद्यान्न, ताजे फल और सब्जियां, प्रसंस्कृत उत्पाद आदि से संबंधित करीब 130 भौगोलिक संकेत (जीआई) हैं. भौगोलिक संकेत उत्पाद की विशेषताओं को दर्शाता है. इससे उत्पाद का बाजार मूल्य बढ़ता है और उपभोक्ता उत्पाद की गुणवत्ता और विशेषता से खरीदी के लिए आकर्षित होते हैं.

देश से कृषि निर्यात बढ़ने के कई अन्य कारण भी दिखाई दे रहे हैं. सरकार ने नई कृषि निर्यात नीति के तहत ज्यादा मूल्य और मूल्यवर्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा दिया है. निर्यात किए जाने वाले कृषि जिंसों के उत्पादन व घरेलू दाम में उतार-चढ़ाव पर लगाम लगाने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं. 

कृषि निर्यात की प्रक्रिया के मध्य खराब होने वाले सामान और कृषि पदार्थों की साफ-सफाई के मसले पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है. साथ ही राज्यों की कृषि निर्यात में ज्यादा भागीदारी, बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स में सुधार और नए कृषि उत्पादों के विकास में शोध एवं विकास गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया है. पिछले वर्ष 2020 से शुरू हुई किसान ट्रेनों ने भी कृषि निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.

कृषि निर्यात बढ़ाने पर कई और बातों पर भी ध्यान दिया जाना होगा. कृषि निर्यातकों के हितों के अनुरूप मानकों में उपयुक्त बदलाव किया जाना होगा, ताकि कृषि निर्यातकों को कार्यशील पूंजी आसानी से प्राप्त हो सके. 

सरकार को अन्य देशों की मुद्रा के उतार-चढ़ाव, सीमा शुल्क में मुश्किलें जैसे कई मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा. देश के चिह्नित फूड पार्कों में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, शोध सुविधाओं, परीक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाना होगा. 15वें वित्त आयोग द्वारा गठित कृषि निर्यात पर उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समूह ने जो सिफारिशें सरकार को सौंपी हैं, उनका क्रियान्वयन लाभप्रद होगा.

Web Title: Jayantilal Bhandari blog: India agricultural exports growing amid Corona crisis

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